स्मार्टफोन के दौर में बच्चों को कैसे सिखाएं 'अहिंसा' और 'क्षमा'? महावीर जयंती पर माता-पिता के लिए खास टिप्स
डिजिटल क्रांति के इस दौर में हमारे बच्चों का बचपन स्क्रीन के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया है। एक तरफ जहां इंटरनेट से ज्ञान के नए दरवाजे खुले हैं, वहीं दूसरी ओर स्मार्टफोन, हिंसक ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया ने बच्चों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और अधीरता बढ़ा दी है। छोटी-छोटी बातों पर नाराज होना या सहपाठियों से बदतमीजी करना आजकल एक आम बात बनती जा रही है। ऐसे माहौल में महावीर जयंती का पावन अवसर हमें अपने बच्चों को सही दिशा दिखाने का बेहतरीन मौका देता है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने दुनिया को अहिंसा, सत्य, और क्षमा का संदेश दिया था। यदि माता-पिता अपने बच्चों के जीवन में इन सिद्धांतों को सही तरीके से उतारना सिखाएं, तो वे न केवल स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं बल्कि उनका मानसिक और नैतिक विकास भी बहुत सुंदर तरीके से हो सकता है। डिजिटल युग में बच्चों की मानसिकता और नैतिक चुनौतियां आज की युवा पीढ़ी वर्चुअल दुनिया में इतनी व्यस्त है कि उनका वास्तविक मानवीय संबंधों से जुड़ाव कम होता जा रहा है। वीडियो गेम्स में दुश्मनों को मारना और आक्रामक भाषा का प्रयोग करना...